ग्रंथसार
गुरुदेव, संसार की इस चमक-धमक में वह कौन सा सत्य छिपा है जिसे पाने के लिए हमें अपनी आँखों को इस सांसारिक वैभव से हटाना पड़ता है?
ईश उपनिषद् · उपनिषद् 8
स्वर्णमय आवरण के परे