ग्रंथसार
मृत्यु के शीतल सन्नाटे में जीवन का कौन सा स्पंदन सदा जीवित रहता है, इसे जानने की जिज्ञासा ही मोक्ष का प्रथम सोपान है।
कठ उपनिषद् · उपनिषद् 6
अणु से भी सूक्ष्म आत्मा