ग्रंथसार
क्या आपने कभी सोचा है कि जिस संसार को हम अपनी आंखों से देख रहे हैं, वह किसी उल्टे वृक्ष की तरह क्यों है, जिसकी जड़ें नीचे नहीं, ऊपर आकाश की ओर हैं?
कठ उपनिषद् · उपनिषद् 7
उर्ध्वमूल वृक्ष