ग्रंथसार
स्वयं इंद्र के मुख से आत्म-साक्षात्कार का गूढ़ मार्ग सुनकर जीवन की सार्थकता का बोध होता है।
कौषीतकि उपनिषद् · उपनिषद् 11
इंद्र और आत्म-अनुसंधान