ग्रंथसार
चेतना की चार अवस्थाओं के माध्यम से आत्म-साक्षात्कार की एक आध्यात्मिक यात्रा।
मुख्य उपनिषद् · उपनिषद् 6
माण्डूक्य उपनिषद्