ग्रंथसार
ज्ञान की वह अखंड धारा, जो आदि-स्रष्टा से आरंभ होकर गुरु-शिष्य की पवित्र परंपरा में प्रवाहित होती है, सत्य की खोज का आधार बनती है।
मुण्डक उपनिषद् · उपनिषद् 1
परंपरा और संकल्प