ग्रंथसार
अहंकार के विसर्जन की वह चरम अवस्था, जहाँ ज्ञानी अपने नाम और रूप को छोड़कर अनंत परमात्मा में एकाकार हो जाता है।
मुण्डक उपनिषद् · उपनिषद् 10
नदियाँ और सागर का मिलन