ग्रंथसार
संसार की समस्त भौतिक उपलब्धियों से परे, उस अक्षर ब्रह्म को जानने का मार्ग ही परा विद्या है।
मुण्डक उपनिषद् · उपनिषद् 2
परा और अपरा विद्या