ग्रंथसार
पिप्पलाद ऋषि के चरणों में छह जिज्ञासुओं की यह यात्रा उस परम तत्व के बोध पर जाकर पूर्ण होती है, जहाँ ज्ञात और अज्ञात का भेद मिट जाता है।
प्रश्न उपनिषद् · उपनिषद् 12
खोज पर एक अंतिम चिंतन