ग्रंथसार
ओंकार की साधना और उसके तीन मात्राओं के माध्यम से मनुष्य की चेतना किस प्रकार सर्वोच्च पद की ओर अग्रसर होती है, यही इस संवाद का मर्म है।
प्रश्न उपनिषद् · उपनिषद् 5
ध्यान का अक्षर