ग्रंथसार
परम सत्ता के रहस्य और उस तक पहुँचने के मार्ग का अन्वेषण ही इस अंतिम पड़ाव का सार है।
श्वेताश्वतर उपनिषद् · उपनिषद् 6
जीवात्मा और परमात्मा