ग्रंथसार
परम सत्ता का ज्ञान केवल श्रम का फल नहीं, बल्कि उसकी अनुकंपा का वरदान है।
श्वेताश्वतर उपनिषद् · उपनिषद् 8
दिव्य कृपा का रहस्य