ग्रंथसार
भगवान ब्रह्मा जी के हृदय से उपजे महर्षि भृगु का तेज ऐसा था कि मानों साक्षात अग्नि ही मानवीय रूप में अवतरित हो गई हो।
भार्गव पुराण · अध्याय 1
भृगु वंश का उद्भव