ग्रंथसार
पवित्र नदियों का प्रवाह केवल जल का बहाव नहीं, अपितु ब्रह्मांड की चेतना का धरती पर अमृत रूप में उतरना है।
ब्रह्माण्ड उपपुराण · अध्याय 4
दिव्य नदियों का अवतरण