ग्रंथसार
महर्षि दुर्वासा के जीवन की यह अंतिम यात्रा उस बिंदु पर पहुँचती है जहाँ उनका क्रोध पूरी तरह से परम करुणा में विलीन हो जाता है।
दुर्वासा पुराण · अध्याय 12
अनंत कृपा