ग्रंथसार
शक्ति केवल एक बल नहीं, बल्कि संपूर्ण अस्तित्व का आधार और चेतना का ही विस्तार है।
कालिका पुराण · अध्याय 11
देवी शक्ति का दार्शनिक स्वरूप