ग्रंथसार
दक्ष का अहंकार और सती का आत्म-बलिदान कालिका पुराण की उस घटना को जन्म देता है, जो देवी के रौद्र और उग्र रूपों के प्राकट्य का आधार बनती है।
कालिका पुराण · अध्याय 3
महायज्ञ और दिव्य परिवर्तन