ग्रंथसार
देवी की उपासना केवल एक क्रिया नहीं, अपितु स्वयं को ईश्वर के चरणों में समर्पित करने का मार्ग है।
कालिका पुराण · अध्याय 9
दिव्य भक्ति के अनुष्ठान और विधान