ग्रंथसार
निष्काम भाव से किए गए कर्म किस प्रकार बंधन से मुक्ति का माध्यम बनते हैं, कपिल मुनि इसे सरल शब्दों में समझाते हैं।
कपिल पुराण · अध्याय 9
कर्म और सत्ता का समन्वय