ग्रंथसार
श्रद्धा के बिना कर्म केवल शरीर की थकान है, परंतु भक्ति के साथ वही कर्म मुक्ति का साधन बन जाता है।
मारीच पुराण · अध्याय 11
भक्ति का मार्ग