ग्रंथसार
अहंकार जब अपनी चरम सीमा को छूता है, तब वह स्वयं के विनाश का द्वार खोल देता है, यही असुर हिरण्यकशिपु की गाथा का सार है।
नरसिंह पुराण · अध्याय 3
हिरण्यकशिपु का उत्कर्ष