ग्रंथसार
असुर कुल में जन्म लेकर भी नन्हे प्रह्लाद के हृदय में केवल भगवान नारायण का ही वास था।
नरसिंह पुराण · अध्याय 4
प्रह्लाद की अनन्य भक्ति