ग्रंथसार
अनंत काल के चक्र में सिमटी हुई सृष्टि की आयु और उसके विस्तार का वर्णन ही इस द्वितीय सोपान का मुख्य केंद्र है।
पराशर पुराण · अध्याय 2
काल का विस्तार