ग्रंथसार
शब्द की ध्वनि में ही सृष्टि का निर्माण और विनाश समाहित है, जो नाम-जप से जाग्रत होता है।
सनत्कुमार पुराण · अध्याय 5
मंत्रों की शक्ति