ग्रंथसार
सृष्टि के कण-कण में व्याप्त भगवान सूर्य की आभा ही संपूर्ण जगत को प्राण और प्रकाश प्रदान करती है।
सौर पुराण · अध्याय 1
सूर्यदेव की महिमा