ग्रंथसार
सूर्य के रथ की गति से ही सृष्टि की मर्यादाएँ तय होती हैं और इसी अनुशासन में जीवन का परम अर्थ छिपा है।
सौर पुराण · अध्याय 2
दिव्य अनुशासन का अवतरण