ग्रंथसार
भगवान शिव की सेवा केवल कर्मकांड नहीं, अपितु आत्मा का भगवान के चरणों में पूर्ण समर्पण है।
शिवधर्म पुराण · अध्याय 10
भक्ति सेवा का मार्ग