ग्रंथसार
भगवान शिव की उपासना केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि हृदय की वह पुकार है जो भक्त को असीम शांति और आत्मज्ञान के द्वार तक ले जाती है।
शिवधर्म पुराण · अध्याय 6
शिव उपासना का गौरव