ग्रंथसार
अंधेरी अमावस्या की रात में जब एक दीया दूसरे दीये को जन्म देता है, तो वह केवल मिट्टी का पात्र नहीं, अपितु आत्मा का प्रकाश बन जाता है।
दीपोत्सव · पाठ 3
दीपावली: महालक्ष्मी पूजन और भीतर का आलोक