ग्रंथसार
दीपों की कतारें तो बाहर का अंधकार मिटाती हैं, परंतु भाई और बहन के हृदय का प्रेम वह ज्योति है जो जीवन भर का संबल बन जाती है।
दीपोत्सव · पाठ 5
भाई दूज: स्नेह और सुरक्षा का अटूट बंधन