ग्रंथसार
गुरुदेव, दीपावली की दीपमालाएँ तो बुझ गईं, किंतु मन में जलती उस ज्योति का क्या, जो हमें निरंतर प्रकाश की ओर ले जाती है?
दीपोत्सव · पाठ 9
दीप: अंतर्मन का प्रकाश और निरंतरता