ग्रंथसार
वृन्दावन के आँगन में उत्सव की एक लहर सी दौड़ रही थी, क्योंकि नन्द बाबा और सभी बड़े-बूढ़े गोप एक विशाल यज्ञ की तैयारी में जुटे हुए थे।
दीपावली की कथाएँ · पाठ 5
गोवर्धन पूजा