ग्रंथसार
वृषभानु जी के राजमहल में सब कुछ था, बस एक सन्तान की किलकारी नहीं थी, और यह सूनापन उन्हें और उनकी धर्मपत्नी कीर्तिदा मैया को हर पल सालता था।
कृष्ण पर्व कथाएँ · पाठ 4
श्री राधा का प्राकट्य