ग्रंथसार
हाथ में जपमाला और कमंडल लिए माँ ब्रह्मचारिणी की कथा बताती है कि प्रतीक्षा के लंबे समय में अपने संकल्प को कैसे सँभाला जाता है।
नवदुर्गा: नौ दिन, नौ रूप — कथा, व्रत और पूजन · पाठ 3
दूसरा दिन: माँ ब्रह्मचारिणी