ग्रंथसार
माँ के हाथों में अस्त्र हैं, फिर भी मुख पर शांति है—उनके विवाह से जुड़ी लोककथा इसी अनोखे संगम को समझाती है।
नवदुर्गा: नौ दिन, नौ रूप — कथा, व्रत और पूजन · पाठ 4
तीसरा दिन: माँ चन्द्रघण्टा