ग्रंथसार
जब सृष्टि का कोई आकार नहीं था, तब माँ की एक कोमल मुस्कान से आरंभ होने वाली कथा हमें क्या सिखाती है?
नवदुर्गा: नौ दिन, नौ रूप — कथा, व्रत और पूजन · पाठ 5
चौथा दिन: माँ कूष्माण्डा