ग्रंथसार
परम्परागत मान्यता है कि जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था, तब देवी ने अपनी मुस्कान से ब्रह्माण्ड की रचना की।
नवरात्रि और नवदुर्गा · पाठ 4
माँ कूष्माण्डा की कथा