ग्रंथसार
शीत की ओस से भीगी धरती पर जब सामूहिक आस्था का महाकुंभ उतरता है, तब मनुष्य केवल जल में नहीं, बल्कि स्वयं के भीतर की चेतना में डुबकी लगाता है।
शिशिर के पर्व · पाठ 6
कुंभ और जन-संगम