ग्रंथसार
वर्षा की रिमझिम फुहारों के बीच प्रकृति के अनकहे रहस्यों को समझने की जिज्ञासा लिए देवरात अपने गुरु के चरणों में उपस्थित था।
वर्षा के पर्व · पाठ 4
नाग पंचमी: प्रकृति के प्रति कृतज्ञता