ग्रंथसार
थोड़े-से दूध और चुटकी-भर चावल की लोककथा संकष्टी चतुर्थी पर पूजा के साथ बाँटने का भाव भी सिखाती है।
व्रत-पर्व: विधि, कथा और तिथि · पाठ 5
संकष्टी चतुर्थी