ग्रंथसार
एक व्याध रात भर शिकार की प्रतीक्षा करता रहा, लेकिन भोर तक उसके हाथ से धनुष छूट चुका था—महाशिवरात्रि की यह कथा उसी परिवर्तन की है।
व्रत-पर्व: विधि, कथा और तिथि · पाठ 6
महाशिवरात्रि