ग्रंथसार
जन्माष्टमी की रात हमें उस कारागार तक ले जाती है, जहाँ भय के बीच एक माँ अपने शिशु को सुरक्षित देखना चाहती थीं।
व्रत-पर्व: विधि, कथा और तिथि · पाठ 8
जन्माष्टमी व्रत