ग्रंथसार
क्या तुमने कभी उस अदृश्य धुरी का अनुभव किया है जिस पर ब्रह्मांड का पूरा भार निर्भीक होकर टिका हुआ है?
अथर्ववेद · अध्याय 12
स्तंभ का स्वरूप