ग्रंथसार
आश्रम की शांत संध्या में गुरु के मुख से राजधर्म के गूढ़ रहस्यों को सुनकर देवरात का मस्तक श्रद्धा से झुक गया।
अथर्ववेद · अध्याय 16
राजधर्म और राष्ट्र का उत्कर्ष