ग्रंथसार
आयु केवल श्वासों की गणना नहीं, बल्कि उन श्वासों का सत्कर्मों में रूपांतरण है, यही दीर्घायु का गूढ़ रहस्य है।
अथर्ववेद · अध्याय 5
आयुष्या और दीर्घजीवन