ग्रंथसार
नदी के तट पर बैठी धरा की गोद में जब शिष्य ने प्रश्न किया, तब आचार्य ने उसे पृथ्वी के उस दिव्य स्वरूप से परिचित कराया जो केवल मिट्टी नहीं, बल्कि समस्त जीवन का आधार है।
अथर्ववेद · अध्याय 10
पृथ्वी सूक्त का वैभव