ग्रंथसार
गुरुदेव की ज्ञानमयी दृष्टि से रोहित का तेजस्वी स्वरूप ऐसे उजागर हुआ, जैसे घने अंधकार को चीरकर भोर का प्रथम प्रकाश प्रकट होता है।
अथर्ववेद · अध्याय 11
रोहित का तेजस्वी स्वरूप