ग्रंथसार
क्या आपने कभी उस अखंड धुरी का अनुभव किया है, जिस पर टिककर यह चराचर जगत अपनी लय में नृत्य कर रहा है?
अथर्ववेद · अध्याय 19
स्तंभ और सृष्टि का आधार