ग्रंथसार
एक जिज्ञासु शिष्य पूछता है—वेद की वाणी सबसे पहले अग्नि को ही क्यों पुकारती है? गुरु उत्तर देते हैं, और एक छोटी लौ जीवन के पूरे धर्म को खोल देती है।
ऋग्वेद · अध्याय 1
पवित्र दृष्टि का उदय