ग्रंथसार
गुरुदेव, रात्रि के इस घने अंधकार के विदा होते ही क्षितिज पर वह कैसा दिव्य स्पंदन है जो समस्त चराचर को जगा देता है?
ऋग्वेद · अध्याय 11
प्रथम मंडल: उषा का प्रातःकालीन प्रकाश